दो चोरों की कहानी
एक गांव में दो चोर रहा करते थे।दोनों चोरी करने का काम करते थे तथा दोनों का काम एक यही था।( चोरी करना) इसलिए दोनों एक दूसरे से बहुत ज्यादा ईर्ष्या करते थे तथा जलते थे। दोनों चोर जब चोरी करते थे तो एक दूसरे को पकड़ने का कोशिश करते थे और एक दूसरे को पकड़ा करके जब गांव वाले उसे मारते थे तो एक दूसरे की हंसी उड़ा कर मजा लेते । गांव के सभी घरों ने इन लोगों ने चोरी की कोई वैसा घर नहीं था जिन्हें नहीं चुराया । इन दोनों से परेशान होकर के गांव वालों ने इन दोनों को गांव से बाहर करने की कोशिश बहुत किया मगर ना कर सका।1 दिन दोनों ने सोचा कि हम आसपास के सभी गांव में बहुत ज्यादा बदनाम हो चुके हैं तो क्यों ना हम आज से कोई अच्छा काम शुरू करें और यही सोच कर के यह दोनों आपस में विचार करते हैं अपने बारे में सोचते हैं
इस बारे में सोचते सोचते हैं इन दोनों चोरों में दोस्ती हो गई और इन दोनों ने सोचा कि अब हम ईमानदारी से काम करके गांव वालों के बीच में हम अपना मान-सम्मान बढ़ाकर उन्हें अपना गांव आएंगे और तब तक हम इस गांव से दूर रहेंगे।यही सोचकर यह दोनों चोर एक दिन चुपके से बिना किसी को कहे अपने घर से निकल जाते हैं और काम करने की सोच कर एक शहर की ओर जाते हैं लेकिन रास्तेसेना हो करके वह जंगल के रास्ते में जाते हैं जिधर से कोई आदमी ना मिले क्योंकि इन्हें चुपके से जा भागना था काम करने तो जाते हैं लेकिन जाते-जाते यह दोनों चोर रास्ता भटक जाते हैं और जंगलों से नहीं निकल पाते हैं जंगल में ही भटक जाते हैं।काफी देर तक भटकते भटकते परेशान हो जाते हैं अंत में चलते चलते इन्हें एक घर दिखाई देता है जो कि महल के समान होता है।इन दोनों चोरों को भूख प्यास भी लगी थी तो इन लोगों को लगा है कि उस घर में जाकर के कुछ खाने एवं पीने के लिए मांगा जाए तो शायद मिल सकता है।यह दोनों चोर उस घर में जाते हैं और जाकर के आवाज लगाते हैं तो एक बुढ़िया निकलती है जो कि बुढ़िया को कम दिखाई देता है। बुढ़िया बाहर आकर पूछती है कौन है तो यह दोनों चोर बताते हैं कि हम काफी दूर से आए हैं हमें पानी पीने के लिए चाहिए और भूख भी लगी है।दोनों चोरों को गुड़िया घर बुलाती है तथा खाने के लिए रोटी देती है दोनों चोर खाने के बाद बुढ़िया से पूछते हैं कि आपके घर में क्या कोई काम करने के लिए कुछ काम होगा।बुढ़िया सोच कर जवाब देती है हां दो काम तो है जो कि तुम दोनों लोग वह काम को कर सकते हो अगर चाहते हो तो। दोनों चोर चोरों ने अचानक जवाब दिया हां हां क्यों नहीं हम उस काम को जरूर करेंगे बताइए क्या काम है।
बूढ़ी मां ने कहा आज तुम लोग आज थक कर आए हो आराम करो कल मैं तुम लोगों को काम के बारे में जरूर जानकारी देंगे।बूढ़ी मां का बात सुनकर दोनों चोरों को बहुत खुशी हुआ और यह दोनों काम करने की इच्छा से आए थे इसलिए अभी तक तो इन दोनों के मन में चोरी का कोई विचार नहीं था और दोनों आराम से सो गए इन लोगों को लगा कि हमें शायद यहां पर अच्छा काम मिल जाएगा और महल भी अच्छा था खाने-पीने की चीजें भी अच्छी थी देखने रह नहीं सोने आदि सभी चीजें इन लोगों का अच्छी लगी।जैसे ही सुबह हो गई दोनों चोर उठे हैं और बुढ़िया के पास जाते हैं जो कि बुढ़िया सोई हुई थी क्योंकि वह बहुत ही कम चल फिर पाती थी वह एक लाठी के सहारे चलती थी जो कि उसके घर में एक उनका बुड्ढा भी था जो कि वह भी बहुत कम चल फिर पता था उनकी नजरें भी कमजोर हो चुकी थी लाठी के सहारे चलता था घर की देखरेख करता था।
इन दोनों ने काम के बारे में पूछा तो उस बुढ़िया ने काम के बारे में बताने की कोशिश की परंतु वह नहीं उठ पाने के कारण से उन्हें 1 घंटे बाद में बुलाया।दोनों छोर से 1 घंटे के बाद गुड़िया के पास जाते हैं फिर अपने काम के बारे में पूछते हैं तो बुढ़िया ने दोनों को काम के बारे में बताया।
बुढ़िया ने एक चोर को घड़ा भरने का काम दिया तथा दूसरे चोर को गाय चराने का काम दिया।यह दोनों चोर इस काम को पा करके बहुत खुश हुए और इन लोगों को लगा कि बस इतना सा ही काम है और इस काम के लिए हम दोनों को काम पर रखा है इसे छोटा सा काम समझ कर दोनों चोरों ने हामी भरी और खुश होते हुए एक-दूसरे की आंखों में आंखें डाल कर मुस्कुराया।इन दोनों ने सोचा कि यह बुड्ढा एवं गुड़िया कितने ज्यादा बेवकूफ है कि इस छोटे से काम के लिए हम दोनों को रखे हैं जो कि एक ही आदमी से काम किया जा सकता था।इन दोनों की सोच के बारे में बुड्ढी को पता चल जाता है लेकिन बुड्ढी बोलती है कि पहले काम करो फिर मुस्कुराना।
(कहानी का दूसरा पाठ)
बुड्ढी की काम को सुनकर के यह दोनों बहुत खुश होते हैं और इन लोगों को लगता है कि यह बहुत छोटा सा काम है और वहां से चले जाते हैं और अपने काम को करने के बारे में सोचते हैं। इसके बाद दोनों काम को बांटने के बारे में सोचते हैं यह पहला चोर ने सोचा कि मैं घड़ा भर लूंगा।क्योंकि घड़ा देखने में छोटी थी और एक बाल्टी पानी से बाहर जाती है और यह काम सबसे आसान था जबकि गाय चराना बहुत ही मुश्किल था क्योंकि दिन भर का यह काम था और घड़ा भर ना सिर्फ 1 मिनट का काम था।इस कारण दोनों चोरों ने आपस में लड़ाई हो जाती है क्योंकि दोनों चोर आसान काम को करना चाहता था जो कि घड़ा भरना था। और इसके लिए दोनों के बीच में लड़ाई होती है। काफी देर बाद होने के बाद दोनों ने बैठकर के एक विचार सोचा और वह विचार इस प्रकार था। दोनों चोर बारी बारी से काम करेंगे एक दिन घड़ा भरेगा तो दूसरा उस दिन गाय चराने जाएगा।







टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें